परिचय
भारत में साइबर अपराध की जांच के लिए विभिन्न केंद्रीय एजेंसियां कार्यरत हैं। प्रत्येक एजेंसी का अपना विशिष्ट अधिकार क्षेत्र और विशेषज्ञता है। इस भाग में हम इन सभी प्रमुख एजेंसियों को विस्तार से समझेंगे।
इस भाग को पूरा करने के बाद आप केंद्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की संरचना, उनके अधिकार क्षेत्र और साइबर अपराध में उनकी भूमिका को समझ पाएंगे।
CBI - केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो
Central Bureau of Investigation
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो
CBI भारत की प्रमुख जांच एजेंसी है जो गंभीर अपराधों की जांच करती है। यह गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है और देश भर में जांच का अधिकार रखती है।
साइबर क्राइम विंग
CBI में एक समर्पित साइबर क्राइम विंग है जो निम्नलिखित मामलों की जांच करती है:
- बड़े पैमाने पर ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी
- अंतर्राज्यीय साइबर अपराध
- क्रिप्टोकरेंसी संबंधित अपराध
- डार्क वेब पर गंभीर अपराध
- राष्ट्रीय महत्व के साइबर हमले
CBI को किसी राज्य में जांच के लिए राज्य सरकार की सहमति या उच्च न्यायालय/सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की आवश्यकता होती है।
NIA - राष्ट्रीय जांच एजेंसी
National Investigation Agency
राष्ट्रीय जांच एजेंसी
NIA भारत की प्रमुख आतंकवाद विरोधी जांच एजेंसी है। 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले के बाद इसकी स्थापना की गई थी।
साइबर आतंकवाद मामले
NIA निम्नलिखित साइबर आतंकवाद मामलों की जांच करती है:
- आतंकवादी संगठनों द्वारा ऑनलाइन भर्ती
- क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से आतंक वित्तपोषण
- महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर साइबर हमले
- आतंकवादी प्रचार का ऑनलाइन प्रसार
- सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी सामग्री
NIA ने कई मामलों में आतंकवादी संगठनों द्वारा टेलीग्राम और अन्य एन्क्रिप्टेड ऐप्स के माध्यम से भर्ती और संचार की जांच की है।
ED - प्रवर्तन निदेशालय
Enforcement Directorate
प्रवर्तन निदेशालय
ED वित्त मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और मुख्य रूप से मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी मुद्रा उल्लंघनों की जांच करता है।
वित्तीय साइबर अपराध
ED निम्नलिखित वित्तीय साइबर अपराधों की जांच करता है:
- क्रिप्टोकरेंसी मनी लॉन्ड्रिंग
- ऑनलाइन पोंजी स्कीम (जैसे - Gainbitcoin)
- FEMA उल्लंघन के साइबर मामले
- हवाला ट्रांसफर के डिजिटल मामले
- ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुआ से मनी लॉन्ड्रिंग
PMLA के तहत ED को संदिग्ध संपत्ति को अनंतिम रूप से कुर्क करने, गिरफ्तारी करने और तलाशी लेने की व्यापक शक्तियां प्राप्त हैं। इसके तहत दोष सिद्ध होने पर 3 से 7 वर्ष की सजा का प्रावधान है।
NCB - नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो
Narcotics Control Bureau
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो
NCB भारत में मादक पदार्थों की तस्करी और दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रमुख केंद्रीय एजेंसी है।
डार्कनेट ड्रग मामले
NCB इंटरनेट और डार्कनेट पर नशीले पदार्थों की बिक्री से संबंधित मामलों की जांच करता है:
- डार्क वेब मार्केटप्लेस पर ड्रग बिक्री
- क्रिप्टोकरेंसी से ड्रग खरीद-बिक्री
- सोशल मीडिया पर ड्रग तस्करी
- ऑनलाइन फार्मेसी के माध्यम से अवैध दवाएं
- मेल/कूरियर के माध्यम से ड्रग तस्करी
CERT-In - भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल
Indian Computer Emergency Response Team
भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल
CERT-In भारत में साइबर सुरक्षा घटनाओं की निगरानी और प्रतिक्रिया के लिए राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है।
CERT-In के कार्य
- साइबर घटनाओं की रिपोर्टिंग और प्रतिक्रिया
- सुरक्षा खतरों की चेतावनी जारी करना
- साइबर सुरक्षा दिशानिर्देश विकसित करना
- वल्नरेबिलिटी असेसमेंट और पेनेट्रेशन टेस्टिंग
- सुरक्षा ऑडिट और प्रमाणन
CERT-In के 2022 के निर्देशों के अनुसार, निम्नलिखित घटनाओं की 6 घंटे के भीतर रिपोर्ट करना अनिवार्य है:
- डेटा ब्रीच
- रैनसमवेयर अटैक
- क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला
- मालवेयर/वायरस इंफेक्शन
I4C - भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र
Indian Cyber Crime Coordination Centre
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र
I4C देश में साइबर अपराध से निपटने के लिए एक व्यापक और समन्वित दृष्टिकोण प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया है।
I4C के घटक
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल
cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा
1930 हेल्पलाइन
वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए 24x7 हेल्पलाइन
CCTNS एकीकरण
अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क के साथ एकीकरण
CyTrain पोर्टल
पुलिस अधिकारियों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण
याद रखें: जितनी जल्दी रिपोर्ट करें, धन वापसी की संभावना उतनी अधिक
cybercrime.gov.in पोर्टल
यह पोर्टल तीन श्रेणियों में शिकायतें स्वीकार करता है:
| श्रेणी | उदाहरण |
|---|---|
| महिला/बाल संबंधित | साइबर स्टॉकिंग, सेक्सटॉर्शन, CSAM |
| वित्तीय धोखाधड़ी | UPI फ्रॉड, बैंकिंग फ्रॉड, क्रिप्टो स्कैम |
| अन्य साइबर अपराध | हैकिंग, डेटा चोरी, ऑनलाइन धमकी |
NCIIPC - राष्ट्रीय महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र
National Critical Information Infrastructure Protection Centre
राष्ट्रीय महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र
NCIIPC भारत की महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है। यह NTRO के अधीन कार्य करती है।
महत्वपूर्ण क्षेत्र
ऊर्जा (Power & Energy)
विद्युत ग्रिड, तेल और गैस पाइपलाइन
वित्त (Finance)
बैंकिंग, स्टॉक एक्सचेंज, भुगतान प्रणाली
दूरसंचार (Telecom)
मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट बैकबोन
परिवहन (Transport)
रेलवे, हवाई अड्डे, बंदरगाह
सरकार (Government)
ई-गवर्नेंस, डिजिटल इंडिया सेवाएं
रक्षा (Defense)
रक्षा नेटवर्क, सामरिक प्रणाली
एजेंसियों की तुलना
| एजेंसी | मुख्य क्षेत्र | मूल कानून | मंत्रालय |
|---|---|---|---|
| CBI | गंभीर अपराध, भ्रष्टाचार | DSPE Act | गृह (कार्मिक) |
| NIA | आतंकवाद, साइबर आतंकवाद | NIA Act | गृह |
| ED | मनी लॉन्ड्रिंग, FEMA | PMLA, FEMA | वित्त |
| NCB | नशीले पदार्थ | NDPS Act | गृह |
| CERT-In | साइबर घटना प्रतिक्रिया | IT Act 70B | MeitY |
| I4C | साइबर अपराध समन्वय | - | गृह |
| NCIIPC | CII सुरक्षा | IT Act 70A | PMO/NSA |
- CBI को राज्य में जांच के लिए सहमति या न्यायालय आदेश चाहिए, जबकि NIA को नहीं
- 1930 हेल्पलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए है
- CERT-In को 6 घंटे के भीतर साइबर घटनाओं की रिपोर्ट करना अनिवार्य है
- ED PMLA के तहत क्रिप्टो और ऑनलाइन मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करता है
- NCIIPC महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की साइबर सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है
- cybercrime.gov.in पर तीन श्रेणियों में शिकायत दर्ज की जा सकती है