2.5.1 धारा 67: अश्लील सामग्री का प्रकाशन (Obscene Material)
IT अधिनियम की धारा 67 इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री के प्रकाशन और प्रसारण को अपराध बनाती है। यह भारतीय दंड संहिता की धारा 292 का डिजिटल संस्करण है।
"अश्लील" का अर्थ वह सामग्री जो लैंगिक इच्छा को उत्तेजित करती है या जिसका प्रभाव भ्रष्ट और विकृत करने वाला हो। यह Hicklin Test और Ranjit Udeshi निर्णय पर आधारित है।
"जो कोई भी इलेक्ट्रॉनिक रूप में ऐसी कोई सामग्री प्रकाशित या प्रसारित या प्रसारित कराता है जो लैंगिक इच्छा को उत्तेजित करने वाली या अश्लील प्रभाव वाली है..." धारा 67, IT अधिनियम 2000
धारा 67 के आवश्यक तत्व
- प्रकाशन/प्रसारण (Publication/Transmission): इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से
- अश्लील सामग्री (Obscene Material): लैंगिक उत्तेजना या भ्रष्ट प्रभाव
- जानबूझकर कृत्य: अनजाने में नहीं
- सार्वजनिक उपलब्धता: या उपलब्ध कराने का प्रयास
दंड - धारा 67
Sharat Babu Digumarti v. NCT (2017): सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 67 के तहत सक्रिय भूमिका आवश्यक है। केवल इंटरमीडियरी होना पर्याप्त नहीं।
बाज़ी.कॉम मामले में CEO को बरी किया गया क्योंकि उसकी सक्रिय भागीदारी साबित नहीं हुई।
2.5.2 धारा 67A: यौन स्पष्ट सामग्री (Sexually Explicit Material)
धारा 67A यौन स्पष्ट कृत्य (Sexually Explicit Act) वाली सामग्री को कवर करती है। यह धारा 67 से अधिक गंभीर है क्योंकि इसमें स्पष्ट यौन आचरण शामिल है।
67 vs 67A: मुख्य अंतर
धारा 67 (अश्लील)
- लैंगिक उत्तेजना वाली सामग्री
- अर्धनग्न, सुझावात्मक सामग्री
- कम गंभीर दंड
- पहली बार: 3 वर्ष
धारा 67A (यौन स्पष्ट)
- स्पष्ट यौन कृत्य दर्शाना
- पोर्नोग्राफी, सेक्स वीडियो
- अधिक गंभीर दंड
- पहली बार: 5 वर्ष
दंड - धारा 67A
वयस्कों के बीच सहमति से बनाई गई निजी सामग्री को बाद में बिना सहमति प्रकाशित करना भी अपराध है।
लागू धाराएं: 67A + 66E (गोपनीयता उल्लंघन) + BNS 356 (मानहानि)
2.5.3 धारा 67B: बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM)
धारा 67B IT अधिनियम का सबसे गंभीर सामग्री-संबंधी अपराध है। यह बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material - CSAM) के निर्माण, प्रकाशन, संग्रह और प्रसारण को अपराध बनाती है।
CSAM दुनिया भर में सबसे गंभीर साइबर अपराधों में से एक है। भारत में IT अधिनियम और POCSO दोनों के तहत कार्रवाई होती है। दोहरा दंड संभव।
धारा 67B के अंतर्गत कृत्य
- प्रकाशन/प्रसारण: बच्चों को यौन स्पष्ट कृत्य में दर्शाने वाली सामग्री
- संग्रह (Collection): ऐसी सामग्री का संग्रह या भंडारण
- ग्रूमिंग (Grooming): ऑनलाइन बच्चों को यौन संबंध के लिए प्रलोभित करना
- सुगम बनाना (Facilitation): बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण को सुगम बनाना
- रिकॉर्डिंग: बच्चों के यौन शोषण की रिकॉर्डिंग
दंड - धारा 67B
"बच्चा" की परिभाषा
IT अधिनियम धारा 67B: "बच्चा" का अर्थ 18 वर्ष से कम आयु का व्यक्ति
POCSO अधिनियम: भी 18 वर्ष की सीमा मानता है
ध्यान दें: यदि पीड़ित 18 वर्ष से कम है, तो सहमति अप्रासंगिक है
एक टेलीग्राम ग्रुप में CSAM साझा किया जा रहा था। ग्रुप में 500+ सदस्य थे। कुछ सदस्य सामग्री अपलोड करते थे, अन्य डाउनलोड और शेयर करते थे।
लागू धाराएं:
- धारा 67B: सभी सदस्यों पर - CSAM प्रकाशन/संग्रह
- POCSO धारा 13, 14, 15: बाल अश्लीलता
- ग्रुप एडमिन: अधिक दायित्व - सुगम बनाने के लिए
- अपलोडर: सबसे गंभीर - निर्माण/वितरण
2.5.4 POCSO अधिनियम के साथ समन्वय
POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) अधिनियम 2012 बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों का विशेष कानून है। CSAM मामलों में IT अधिनियम और POCSO दोनों साथ लागू होते हैं।
POCSO की प्रासंगिक धाराएं
| धारा | अपराध | दंड |
|---|---|---|
| धारा 13 | बाल अश्लीलता का उपयोग | 5 वर्ष + जुर्माना |
| धारा 14 | बाल अश्लीलता में बच्चे का उपयोग | 5 वर्ष (पहली), 7 वर्ष (दूसरी) |
| धारा 15 | बाल अश्लीलता का भंडारण | 3 वर्ष (भंडारण), 5 वर्ष (वितरण) |
IT अधिनियम 67B + POCSO: दोनों कानूनों के तहत एक साथ मुकदमा चल सकता है। यह दोहरे दंड का मामला नहीं है क्योंकि दोनों कानूनों के उद्देश्य अलग हैं।
POCSO की विशेषता: विशेष अदालत, बंद कमरे में सुनवाई, पीड़ित-केंद्रित प्रक्रिया
IT अधिनियम vs POCSO: तुलना
IT अधिनियम धारा 67B
- डिजिटल माध्यम केंद्रित
- प्रकाशन, प्रसारण पर जोर
- ऑनलाइन ग्रूमिंग शामिल
- अधिकतम 7 वर्ष
POCSO अधिनियम
- बच्चों की सुरक्षा केंद्रित
- यौन हमला, उत्पीड़न शामिल
- विशेष अदालत का प्रावधान
- गंभीर मामलों में आजीवन कारावास
2.5.5 डीपफेक, मॉर्फिंग और रिवेंज पोर्न
आधुनिक तकनीक ने नए प्रकार के यौन अपराध उत्पन्न किए हैं। डीपफेक (AI-generated fake videos), मॉर्फिंग (image manipulation), और रिवेंज पोर्न (non-consensual intimate images) गंभीर समस्याएं हैं।
डीपफेक (Deepfakes)
डीपफेक: AI तकनीक का उपयोग करके किसी व्यक्ति का चेहरा अश्लील वीडियो में लगाना। यह अत्यंत यथार्थवादी दिखता है और पहचानना कठिन है।
डीपफेक पर लागू धाराएं
- IT 67/67A: अश्लील/यौन स्पष्ट सामग्री का प्रकाशन
- IT 66E: गोपनीयता का उल्लंघन
- IT 66D: प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी
- BNS 356: मानहानि
- BNS 351: आपराधिक धमकी (यदि ब्लैकमेल)
- IT 67B + POCSO: यदि बच्चा शामिल
मॉर्फिंग (Image Morphing)
किसी व्यक्ति की तस्वीर को अश्लील या यौन सामग्री में संपादित करना। डीपफेक से सरल लेकिन समान रूप से हानिकारक।
अभियुक्त ने पीड़िता की फेसबुक प्रोफाइल फोटो डाउनलोड की और उसे अश्लील छवियों में मॉर्फ किया। फिर इन छवियों को टेलीग्राम ग्रुप में शेयर किया।
लागू धाराएं:
- IT 67A: यौन स्पष्ट सामग्री का प्रकाशन
- IT 66E: गोपनीयता उल्लंघन
- BNS 356: मानहानि
- BNS 78: स्टॉकिंग (यदि बार-बार)
रिवेंज पोर्न (Revenge Porn)
रिवेंज पोर्न: संबंध टूटने के बाद पूर्व साथी की अंतरंग छवियां/वीडियो बिना सहमति प्रकाशित करना। यह "नॉन-कंसेंसुअल इंटिमेट इमेज (NCII)" भी कहलाता है।
| स्थिति | लागू धाराएं |
|---|---|
| अंतरंग छवि का प्रकाशन | IT 67A + IT 66E |
| धमकी देकर पैसे मांगना | BNS 308 (जबरन वसूली) |
| प्रतिष्ठा को नुकसान | BNS 356 (मानहानि) |
| महिला पीड़ित | BNS 77 (Voyeurism) भी लागू |
IT (Intermediary Guidelines) Rules 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को 24 घंटे में NCII हटाना अनिवार्य है।
शिकायत: प्लेटफॉर्म की Grievance Officer को + cybercrime.gov.in पर
2.5.6 सेक्सटॉर्शन (Sextortion)
सेक्सटॉर्शन: अंतरंग छवियों/वीडियो का उपयोग करके पीड़ित से पैसे या और अंतरंग सामग्री की जबरन वसूली। यह ब्लैकमेल + यौन शोषण का संयोजन है।
सेक्सटॉर्शन के प्रकार
वीडियो कॉल स्कैम
- अज्ञात व्यक्ति से वीडियो कॉल
- पीड़ित को अश्लील कृत्य करने को कहा
- रिकॉर्डिंग का उपयोग ब्लैकमेल में
- पैसे या और वीडियो की मांग
रिलेशनशिप आधारित
- संबंध के दौरान साझा की गई छवियां
- संबंध टूटने के बाद धमकी
- वायरल करने की धमकी
- पैसे या मिलने की मांग
सेक्सटॉर्शन पर लागू धाराएं
| कृत्य | धारा | दंड |
|---|---|---|
| जबरन वसूली | BNS 308 | 7 वर्ष तक |
| यौन सामग्री प्रकाशन | IT 67A | 5-7 वर्ष |
| गोपनीयता उल्लंघन | IT 66E | 3 वर्ष |
| आपराधिक धमकी | BNS 351 | 2-7 वर्ष |
| यदि नाबालिग शामिल | IT 67B + POCSO | 7+ वर्ष |
- पैसे न दें: ब्लैकमेलर कभी रुकता नहीं
- साक्ष्य सहेजें: स्क्रीनशॉट, चैट, नंबर
- तुरंत रिपोर्ट: 1930 या cybercrime.gov.in
- प्लेटफॉर्म रिपोर्ट: अकाउंट रिपोर्ट करें
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 67 vs 67A vs 67B: 67 (अश्लील) < 67A (यौन स्पष्ट) < 67B (CSAM - सबसे गंभीर)
- CSAM + POCSO: बच्चों के मामलों में दोनों कानून साथ लागू
- "बच्चा" = 18 वर्ष से कम: सहमति अप्रासंगिक
- डीपफेक: IT 67A + 66E + 66D + BNS 356
- रिवेंज पोर्न: 24 घंटे में हटाने का नियम (IT Rules 2021)
- सेक्सटॉर्शन: BNS 308 (जबरन वसूली) + IT धाराएं
भाग 2.5 क्विज़
CSAM और अश्लीलता कानूनों की अपनी समझ का परीक्षण करें।
धारा 67B सबसे गंभीर है क्योंकि इसमें बच्चे शामिल हैं। CSAM (Child Sexual Abuse Material) दुनिया भर में सबसे गंभीर साइबर अपराधों में से एक है।
IT अधिनियम धारा 67B और POCSO दोनों में "बच्चा" = 18 वर्ष से कम आयु का व्यक्ति। इस आयु से कम के लिए सहमति अप्रासंगिक है।
POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) अधिनियम बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों का विशेष कानून है। CSAM मामलों में IT 67B और POCSO दोनों साथ लागू होते हैं।
डीपफेक पर कई धाराएं लागू: IT 67A (यौन सामग्री) + 66E (गोपनीयता) + 66D (प्रतिरूपण) + BNS 356 (मानहानि)। यदि ब्लैकमेल हो तो BNS 351 भी।
IT (Intermediary Guidelines) Rules 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को 24 घंटे में NCII (Non-Consensual Intimate Images) हटाना अनिवार्य है।
सेक्सटॉर्शन में BNS धारा 308 (जबरन वसूली/Extortion) मुख्य धारा है क्योंकि इसमें अंतरंग सामग्री की धमकी देकर पैसे या सामग्री मांगी जाती है।
धारा 67: लैंगिक उत्तेजना वाली/अश्लील सामग्री। धारा 67A: स्पष्ट यौन कृत्य (sexually explicit act) दर्शाने वाली सामग्री। 67A अधिक गंभीर है।
Sharat Babu Digumarti v. NCT (2017): सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 67 के तहत सक्रिय भूमिका आवश्यक है। केवल इंटरमीडियरी होना पर्याप्त नहीं। बाज़ी.कॉम CEO को बरी किया गया।
POCSO धारा 15: बाल अश्लीलता (child pornography) के भंडारण से संबंधित है। भंडारण के लिए 3 वर्ष, वितरण के लिए 5 वर्ष तक की सजा।
रिवेंज पोर्न पीड़ित को: (1) cybercrime.gov.in पर शिकायत, (2) प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट (24 घंटे में हटाना अनिवार्य), (3) पुलिस/साइबर सेल में FIR दर्ज करनी चाहिए।
