भाग 8.1 / 7

धारा 69A IT Act - ब्लॉकिंग शक्तियां

केंद्र सरकार की वेबसाइट, ऐप और सामग्री को सार्वजनिक पहुंच से अवरुद्ध करने की शक्ति, संवैधानिक आधार, और प्रक्रियात्मक सुरक्षाओं का संपूर्ण विश्लेषण।

~90 मिनट 6 खंड

8.1.1 धारा 69A का परिचय (Introduction to Section 69A)

धारा 69A IT अधिनियम, 2000 में 2008 के संशोधन द्वारा जोड़ी गई। यह केंद्र सरकार को विशिष्ट आधारों पर किसी भी कंप्यूटर संसाधन में किसी भी जानकारी तक सार्वजनिक पहुंच को अवरुद्ध करने का निर्देश देने की शक्ति प्रदान करती है।

"Section 69A empowers the Central Government to direct any agency of the Government or any intermediary to block public access to any information in any computer resource." IT Act, 2000 (as amended in 2008)

धारा 69A क्यों जोड़ी गई?

  • राष्ट्रीय सुरक्षा: आतंकवाद और राष्ट्र-विरोधी सामग्री को रोकना
  • सार्वजनिक व्यवस्था: सांप्रदायिक हिंसा भड़काने वाली सामग्री पर नियंत्रण
  • मूल IT Act की कमी: 2000 के अधिनियम में ब्लॉकिंग का कोई प्रावधान नहीं था
  • अंतर्राष्ट्रीय दबाव: आतंकवाद विरोधी सहयोग
1मुख्य अवधारणा

धारा 69A केवल केंद्र सरकार (MeitY) को शक्ति देती है। राज्य सरकारों को यह शक्ति नहीं है।

ब्लॉकिंग आदेश गोपनीय होते हैं - Blocking Rules 2009 के नियम 16 के अनुसार।

8.1.2 ब्लॉकिंग के आधार (Grounds for Blocking)

धारा 69A(1) में छह आधार निर्धारित हैं जिन पर ब्लॉकिंग का आदेश दिया जा सकता है। ये आधार संविधान के अनुच्छेद 19(2) में वर्णित प्रतिबंधों से मेल खाते हैं।

क्र.आधार (Ground)विवरणउदाहरण
1भारत की संप्रभुता और अखंडताSovereignty and Integrity of Indiaअलगाववादी सामग्री, मानचित्र विवाद
2भारत की रक्षाDefence of Indiaसैन्य गोपनीय जानकारी, रक्षा रहस्य
3राज्य की सुरक्षाSecurity of the Stateआतंकवादी सामग्री, उग्रवाद
4विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधFriendly Relations with Foreign Statesकूटनीतिक विवाद, विदेश नीति
5सार्वजनिक व्यवस्थाPublic Orderदंगे भड़काना, सांप्रदायिक हिंसा
6उपरोक्त से संबंधित अपराध को उकसानाIncitement to Commission of Cognizable Offenceहिंसा के लिए उकसाना

अनुच्छेद 19(2) से तुलना

संविधान का अनुच्छेद 19(2) वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध (Reasonable Restrictions) की अनुमति देता है:

अनुच्छेद 19(2) के आधार

  • भारत की संप्रभुता और अखंडता
  • राज्य की सुरक्षा
  • विदेशी राज्यों से मैत्रीपूर्ण संबंध
  • सार्वजनिक व्यवस्था
  • शालीनता या नैतिकता
  • न्यायालय अवमानना
  • मानहानि
  • अपराध उकसाना

धारा 69A के आधार

  • भारत की संप्रभुता और अखंडता
  • भारत की रक्षा
  • राज्य की सुरक्षा
  • विदेशी राज्यों से मैत्रीपूर्ण संबंध
  • सार्वजनिक व्यवस्था
  • संज्ञेय अपराध उकसाना
2महत्वपूर्ण अंतर

धारा 69A में "शालीनता या नैतिकता" (Decency or Morality) और "मानहानि" (Defamation) आधार शामिल नहीं हैं।

इसलिए केवल अश्लील या मानहानिकारक होने के आधार पर धारा 69A के तहत ब्लॉकिंग नहीं हो सकती।

8.1.3 ब्लॉकिंग प्रक्रिया (Blocking Procedure)

धारा 69A के तहत ब्लॉकिंग की प्रक्रिया IT (ब्लॉकिंग के लिए प्रक्रिया और सुरक्षाएं) नियम, 2009 में निर्धारित है।

प्रक्रिया का प्रवाह (Procedure Flow)

  1. शिकायत प्राप्त: नोडल अधिकारी को शिकायत प्राप्त होती है
  2. जांच और अग्रेषण: Designated Officer को अग्रेषित
  3. परीक्षा समिति: Committee examines the request
  4. सुनवाई का अवसर: सामग्री प्रदाता को नोटिस (आपातकाल को छोड़कर)
  5. अनुशंसा: समिति Secretary, MeitY को अनुशंसा करती है
  6. आदेश: Secretary ब्लॉकिंग आदेश जारी करता है
  7. कार्यान्वयन: ISPs/Intermediaries द्वारा ब्लॉकिंग

प्रमुख अधिकारी (Key Officers)

पदभूमिकास्तर
Nodal Officerशिकायत प्राप्त करना और अग्रेषित करनाप्रत्येक संगठन में
Designated Officerजांच और समिति को प्रस्तुतMeitY, Joint Secretary स्तर
Committeeपरीक्षा और अनुशंसाअंतर-मंत्रालय
Secretary, MeitYअंतिम आदेशसचिव स्तर
3व्यावहारिक बिंदु

आपातकालीन ब्लॉकिंग: तत्काल मामलों में Designated Officer सीधे अंतरिम आदेश दे सकता है, लेकिन इसे 48 घंटे में समिति के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य है।

8.1.4 श्रेया सिंघल निर्णय का प्रभाव (Shreya Singhal Impact)

श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (2015) 5 SCC 1 में सुप्रीम कोर्ट ने धारा 69A की संवैधानिकता को बरकरार रखा, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिए।

"Section 69A is narrower in scope than Section 66A. It contains several safeguards including the requirement of recording reasons in writing. The blocking order is appealable to the Review Committee." श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (2015) 5 SCC 1

धारा 69A बनाम धारा 66A (जो निरस्त हुई)

धारा 66A (निरस्त)

  • अस्पष्ट शब्दावली - "आपत्तिजनक"
  • कोई प्रक्रियात्मक सुरक्षा नहीं
  • कोई समीक्षा तंत्र नहीं
  • मनमाना उपयोग संभव
  • असंवैधानिक घोषित

धारा 69A (बरकरार)

  • स्पष्ट आधार - अनुच्छेद 19(2) से मेल
  • विस्तृत प्रक्रिया (2009 Rules)
  • समीक्षा समिति का प्रावधान
  • लिखित कारण अनिवार्य
  • संवैधानिक घोषित

श्रेया सिंघल से महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण

  • प्राकृतिक न्याय: ब्लॉकिंग से पहले सुनवाई का अवसर देना चाहिए (आपातकाल को छोड़कर)
  • लिखित कारण: ब्लॉकिंग आदेश में कारण लिखित में होने चाहिए
  • आनुपातिकता: ब्लॉकिंग आनुपातिक होनी चाहिए - पूरी वेबसाइट नहीं, केवल विशिष्ट URL
  • समीक्षा: प्रभावित पक्ष समीक्षा समिति के समक्ष अपील कर सकता है
4न्यायिक सुरक्षा

श्रेया सिंघल ने स्पष्ट किया कि धारा 69A के तहत ब्लॉकिंग न्यायिक समीक्षा के अधीन है। प्रभावित पक्ष उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर कर सकता है।

8.1.5 संवैधानिक विश्लेषण (Constitutional Analysis)

धारा 69A संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) को प्रभावित करती है, लेकिन अनुच्छेद 19(2) के तहत "उचित प्रतिबंध" के रूप में वैध है।

संवैधानिक परीक्षण (Constitutional Tests)

परीक्षणधारा 69A का विश्लेषणनिष्कर्ष
वैध उद्देश्य (Legitimate Aim)राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्थापूरा करती है
विधिक आधार (Legal Basis)IT Act में स्पष्ट प्रावधानपूरा करती है
आवश्यकता (Necessity)ऑनलाइन खतरों से निपटना आवश्यकपूरा करती है
आनुपातिकता (Proportionality)केवल विशिष्ट सामग्री ब्लॉकपूरा करती है*
प्रक्रियात्मक सुरक्षाएं2009 Rules में विस्तृत प्रक्रियापूरा करती है

*आनुपातिकता परीक्षण प्रत्येक मामले में अलग से लागू होता है। पूरी वेबसाइट ब्लॉक करना आनुपातिक नहीं माना जा सकता।

मौलिक अधिकारों पर प्रभाव

  • अनुच्छेद 19(1)(a): वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध
  • अनुच्छेद 19(1)(g): व्यापार की स्वतंत्रता पर प्रभाव (वेबसाइट मालिकों के लिए)
  • अनुच्छेद 21: जानकारी का अधिकार (Right to Information) भी प्रभावित
5विवादास्पद पहलू

गोपनीयता का प्रावधान: Blocking Rules के नियम 16 के अनुसार ब्लॉकिंग आदेश गोपनीय हैं। यह पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों के विरुद्ध तर्क दिया जाता है।

हालांकि, श्रेया सिंघल में इस पर विस्तृत चर्चा नहीं हुई।

8.1.6 व्यावहारिक पहलू (Practical Aspects)

ब्लॉकिंग के प्रकार

  • URL-स्तरीय ब्लॉकिंग: विशिष्ट पेज/पोस्ट ब्लॉक
  • Domain-स्तरीय ब्लॉकिंग: पूरी वेबसाइट ब्लॉक
  • IP-स्तरीय ब्लॉकिंग: IP Address से ब्लॉक (कम प्रभावी)
  • App ब्लॉकिंग: मोबाइल एप्लिकेशन ब्लॉक

ब्लॉकिंग की तकनीकी सीमाएं

  • VPN: VPN के माध्यम से ब्लॉकिंग को बायपास किया जा सकता है
  • Mirror Sites: सामग्री अन्य डोमेन पर पुनः अपलोड
  • DNS over HTTPS: नई तकनीकें DNS ब्लॉकिंग को बायपास कर सकती हैं

हाल के उदाहरण

वर्षब्लॉक किया गयाआधार
2020TikTok, 59 चीनी ऐप्सराष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता
2021Twitter Accounts (किसान आंदोलन)सार्वजनिक व्यवस्था
2022BBC Documentaryविदेशी संबंध, राष्ट्र की अखंडता
2023Various Crypto Websitesवित्तीय धोखाधड़ी
6अधिवक्ता के लिए सुझाव

यदि क्लाइंट की वेबसाइट/ऐप ब्लॉक हो जाए:

  • पहले MeitY से ब्लॉकिंग आदेश की प्रति मांगें (RTI के माध्यम से)
  • समीक्षा समिति के समक्ष प्रतिनिधित्व दायर करें
  • यदि संतुष्टि न हो, उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर करें
  • आनुपातिकता और प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन पर जोर दें

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • धारा 69A: केवल केंद्र सरकार (MeitY) को ब्लॉकिंग की शक्ति
  • 6 आधार: संप्रभुता, रक्षा, सुरक्षा, विदेशी संबंध, सार्वजनिक व्यवस्था, अपराध उकसाना
  • श्रेया सिंघल: धारा 69A संवैधानिक, लेकिन प्राकृतिक न्याय और आनुपातिकता आवश्यक
  • प्रक्रिया: Blocking Rules 2009 में विस्तृत प्रक्रिया
  • समीक्षा: समीक्षा समिति और उच्च न्यायालय में चुनौती संभव
  • गोपनीयता: ब्लॉकिंग आदेश गोपनीय होते हैं (विवादास्पद)